प्रधानमंत्री मातृ वन्दना योजना (PMMVY)

वन्दना योजना (Pradhan Mantri Matru Vandana Yojana) (PMMVY)प्रधानमंत्री मातृ वन्दना योजना (PMMVY)

भारत में अधिकांश महिलाओं को आज भी अल्पपोषण प्रतिकूल रूप से प्रभावित करता है। भारत में हर तीसरी महिला अल्प पोषित है तथा हर दूसरी महिला रक्ताल्पता से पीड़ित है। अल्पपोषित माता अधिकांशतः कम वजन वाले शिशुओं को ही जन्म देती हैं। जब कुपोषण गर्भाशय में ही शुरू हो जाता है तो यह पूरे जीवन चक्र में चलता रहता है और ज्यादातर अपरिवर्तनीय होते हैं। आर्थिक एवं सामाजिक तंगी के कारण कई महिलाएं अपनी गर्भावस्था के आखिरी दिनों तक अपने परिवार के लिए जीविका अर्जित करना जारी रखती हैं। इसके अलावा, वे बच्चे को जन्म देने के बाद, वक्त से पहले काम करना शुरू कर देती हैं, जबकि उनका शरीर इसके लिए तैयार नहीं होता। इस प्रकार वे एक तरफ अपने शरीर को पूरी तरह स्वस्थ्य होने से रोकती हैं और पहले छह माह में अपने नौनिहालों को अनन्य स्तनपान कराने की अपनी सामर्थ्य में भी बाधा पहुंचाती हैं।

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के अनुसरण में देश के सभी जिलों में 01 जनवरी, 2017 से मातृत्व लाभ कार्यक्रम लागू हो गया है। इस कार्यक्रम का नाम प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना रखा गया है।

प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (पीएमएमवीवाई) के अंतर्गत जच्चा-बच्चा स्वास्थ्य संबंधी विशिष्ट शर्तों की पूर्ति पर परिवार में पहले जीवित बच्चे के लिए गर्भवती महिलाओं एवं स्तनपान कराने वाली के खाते में सीधे 5,000/- रुपये की नकद राशि प्रोत्साहन स्वरूप प्रदान की जाएगी।

पात्र लाभार्थी संस्था में प्रसव के बाद जननी सुरक्षा योजना के अंतर्गत मातृत्व लाभ के लिए अनुमोदित मानदंडों के अनुसार शेष राशि प्राप्त करेंगे ताकि औसतन हर महिला को 6,000/- रुपये प्राप्त हो ।

केंद्र प्रायोजित योजना के रूप में पीएमएमवीवाई लाभार्थियों के लाभों का सीधे हस्तांतरण के प्रयोजनार्थ एक समर्पित निलंब लेखा (एस्क्रो एकाउंट) में राज्य सरकारों / संघ राज्य क्षेत्र प्रशासनों को सहायता अनुदान (ग्रांट इन एड प्रदान किया जाएगा।

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अंतर्गत छत्रछाया आईसीडीएस योजना की आंगनवाड़ी सेवा योजना के प्लेटफार्म का प्रयोग करके योजना को वह राज्यों/संघ राज्य क्षेत्र लागू करनेंगे जहां इसे महिला एवं बाल विकास विभाग / समाज कल्याण विभाग के माध्यम कार्यान्वयन किया जा रहा है तथा वह राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों जहां यह योजना स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के माध्यम से कार्यान्वित की जा रही है. इसे स्वास्थ्य प्रणाली के माध्यम से कार्यान्वित किया जाएगा। प्रत्येक राज्य/संघ राज्य क्षेत्र के लिए पीएमएमवीवाई को कार्यान्वित करने वाले विभागों की सूची अनुलग्नक क में उपलब्ध है।

पीएमएमवीवाई को केंद्रीय स्तर पर सृजित वेब आधारित एमआईएस सॉफ्टवेयर एप्लीकेशन के माध्यम से कार्यान्वित किया जाएगा तथा कार्यान्वयन के फोकल बिंदु आंगनवाड़ी केंद्र तथा आशा / एएनएम कर्मी होंगे।

  • मजदूरी की क्षति के बदले में नकद राशि को प्रोत्साहन के रूप में आंशिक क्षतिपूर्ति प्रदान करना ताकि महिलाएं पहले जीवित बच्चे के जन्म से पहले और बाद में पर्याप्त विश्राम कर सकें।
  •  प्रदान किए गए नकद प्रोत्साहन राशि से गर्भवती महिलाओं एवं स्तनपान कराने वाली माताओं में स्वस्थ्य रहने के आचरण में सुधार होगा।

प्रधानमंत्री मातृ वन्दना योजना (PMMVY) लक्षित लाभार्थी

  • ऐसी गर्भवती महिलाओं एवं स्तनपान कराने वाली माताओं को छोड़कर जो केंद्र सरकार या राज्य सरकारों या सार्वजनिक उपक्रमों के साथ नियमित रोजगार में हैं या जो वर्तमान में लागू किसी कानून के अंतर्गत समान लाभ प्राप्त कर रही हैं, सभी गर्भवती महिलाएं एवं स्तनपान कराने वाली माताएं ।
  • सभी पात्र गर्भवती महिलाएं एवं स्तनपान कराने वाली माताएं को परिवार में पहले बच्चे के लिए जो 01:01:2017 या इसके बाद गर्भवती हुई हैं।
  • लाभार्थी के लिए गर्भधारण की तिथि तथा चरण की गणना एमसीपी कार्ड में यथा उल्लिखित उसकी पिछले माहवारी चक्र की तिथि के आधार पर की जाएगी।

गर्भपात / मृत जन्म का मामला

  1. लाभार्थी योजना के अंतर्गत केवल एक बार लाभ प्राप्त करने के पात्र हैं।
  2. गर्भपात / मृत जन्म के मामले में लाभार्थी किसी भावी गर्भधारण की स्थिति में शेष किस्त ( करने के लिए पात्र होंगे। किस्तों) का दावा।
  3.  इस प्रकार पहली किस्त प्राप्त करने के बाद यदि लाभार्थी का गर्भपात हो जाता है तो वह पात्रता के मानदंडों एवं योजना की शर्तों की पूर्ति के अधीन भावी गर्भधारण की स्थिति में केवल दूसरी एवं तीसरी किस्त प्राप्त करने की पात्र होगी। इसी तरह यदि पहली और दूसरी किस्त प्राप्त करने के बाद लाभार्थी का गर्भपात हो जाता है या मृत शिशु का जन्म होता है तो वह पात्रता के मानदंडों एवं योजना की शर्तों की पूर्ति के अधीन भावी गर्भधारण की स्थिति में तीसरी किस्त प्राप्त करने की पात्र होगी।

शिशु मृत्यु का मामला

लाभार्थी योजना के अंतर्गत केवल एक बार लाभ प्राप्त करने के पात्र हैं। अर्थात शिशु की मृत्यु हो जाने की स्थिति में वह योजना के अंतर्गत लाभों का दावा करने की पात्र नहीं होगी, यदि उसने पीएमएमबीवाई के अंतर्गत पहले ही मातृत्व लाभ की सभी किस्तें प्राप्त कर ली है।

गर्भवती एवं स्तनपान कराने वाली आंगनवाड़ी कार्यकर्त्री / आंगवाड़ी सहायिका / आशा भी योजना की शर्तों की पूर्ति के अधीन प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के अंतर्गत लाभ प्राप्त कर सकती हैं।

तीन किस्तों में नकद प्रोत्साहन राशि अर्थात संबंधित राज्य/संघ राज्य क्षेत्र द्वारा संचालन हेतु यथा चिन्हित आंगनबाड़ी केंद्र / अनुमोदित स्वास्थ्य सुविधा केंद्र में गर्भधारण का पंजीकरण कराने पर 1,000 /- रुपये की पहली किस्त, कम से कम एक प्रसव पूर्व जांच कराने पर गर्भधारण के छह माह बाद 2,000 /- रुपये की दूसरी किस्त और बच्चे के जन्म का पंजीकरण कराने तथा बच्चे को बीसीजी, ओपीवी, डीपीटी और हैप्टाइटिस बी या इसके समतुल्य / एवज़ी टीके का पहला चक्र लगवा लेने के बाद 2,000/- रुपये की तीसरी किस्त मिलेगी।

पात्र लाभार्थी संस्था में प्रसव के लिए जननी सुरक्षा योजना के अंतर्गत प्रोत्साहन प्राप्त करेंगे तथा जननी सुरक्षा योजना के अंतर्गत प्राप्त प्रोत्साहन की गणना मातृत्व लाभ के लिए की जाएगी ताकि औसतन हर महिला को 6,000/- रुपये मिलें।

गर्भवती महिलाएं एवं स्तनपान कराने वाली माताएं नीचे दी गई सारिणी में यथानिर्दिष्ट निम्नलिखित चरणों पर तीन किस्तों में 5,000 /- रुपये का नकद लाभ प्राप्त करेंगी :

किस्तशर्तेंराशि
पहली किस्तगर्भधारण का शीघ्र से पंजीकरण कराने पर1,000 /- रुपये
दूसरी किस्त  कम से कम एक प्रसव पूर्व जांच कराने पर (गर्भधारण के 6 माह बाद इसका दावा किया
जा सकता है)
2,000 /- रुपये  
तीसरी किस्तi. बच्चे के जन्म का पंजीकरण कराने पर ii. बच्चे ने बीसीजी, ओपीवी, डीपीटी तथा हैप्टाइटिस बी या इसके समतुल्य / एवजी का पहला वन का टीका करवाने पर2,000 /- रुपये  

 पात्र लाभार्थी संस्था में प्रसव के बाद जननी सुरक्षा योजना के अंतर्गत मातृत्व लाभ के संबंध में अनुमोदित मानदंडों के अनुसार शेष नकद राशि पुरस्कार प्राप्त करेंगे ताकि औसतन हर महिला को 6,000/- रुपये मिले ।

पुराने मातृत्व लाभ कार्यक्रम का समापन

53 प्रायोगिक जिलों (अनुलग्नक-ड) में पुराने मातृत्व लाभ कार्यक्रम के अंतर्गत लाभार्थी, जिन्होंने मातृत्व लाभ की पहली किस्त पहले ही प्राप्त कर ली है, जननी सुरक्षा योजना के अंतर्गत मातृत्व लाभ के संबंध में अनुमोदित मानदंडों के अनुसार नकद प्रोत्साहन प्राप्त करने तथा पीएमएमवीवाई के अंतर्गत तीसरी किस्त भी प्राप्त करने के पात्र होंगे, यदि वे योजना के अंतर्गत अन्यथा पात्र हैं तथा जननी सुरक्षा योजना के अंतर्गत प्रोत्साहन तथा पीएमएमवीवाई के अंतर्गत तीसरी किस्त के लिए निर्धारित शर्तों को पूरा करते हैं।

53 प्रायोगिक जिलों में पात्र लाभार्थी जिन्होंने 01.01.2017 को या इसके बाद पुराने मातृत्व लाभ कार्यक्रम (आईजीएमएसवाई) के अंतर्गत पंजीकरण कराया है परंतु पहली किरत प्राप्त नहीं की है. पीएमएमवीवाई के अंतर्गत पंजीकरण करा सकते हैं।

53 प्रायोगिक जिलों के लिए पुराने मातृत्व लाभ कार्यक्रम के अंतर्गत पंजीकृत लाभार्थियों के पीएमएमवीवाई में विलय की शर्तें:-

क. पुराने मातृत्व लाभ कार्यक्रम के अंतर्गत 3,000 /- रुपये की दो समान किस्तों में लाभार्थियों को 6,000/- रुपये के मातृत्व लाभ का वितरण किया जाता था। 3,000/- रुपये की पहली किस्त ऐसे लाभार्थियों को गर्भधारण के दूसरे सैमिस्टर के बाद प्रदान की जाती थी जिन्होंने कम दो प्रसव पूर्व जांच के साथ आंगनवाड़ी केंद्र / स्वास्थ्य केंद्र में अपना पंजीकरण कराया है। बच्चे के जन्म के पंजीकरण तथा योजना की शर्तों के अनुसार बच्चे का टीकाकरण पूरा होने के बाद दूसरी किस्त दी जाती थी।

ख. इस प्रकार यदि कोई महिला पुराने मातृत्व लाभ कार्यक्रम के अंतर्गत मातृत्व लाभ की पहली किस्त पहले ही प्राप्त कर चुकी है तो वह संस्था में प्रसव के लिए जननी सुरक्षा के अंतर्गत अनुमोदित मानदंडों के अनुसार नकद प्रोत्साहन प्राप्त करने तथा पीएमएमवीवाई के अंतर्गत तीसरी किस्त प्राप्त करने के लिए पात्र होगी यदि वह योजना के अंतर्गत अन्यथा पात्र है और संस्था में प्रसव के लिए जननी सुरक्षा योजना के अंतर्गत प्रोत्साहन तथा पीएमएमवीवाई के अंतर्गत तीसरी किस्त हेतु निर्धारित शर्तों को पूरा करती है ।

मामलों को प्रोसेस करने के लिए निम्नलिखित प्रक्रिया अपनाई जाएगी ताकि सुरक्षित हो कि योजना के अंतर्गत शर्तें पूरी होने तथापूर्ण विवरण के साथ दावे की प्रस्तुति एवं पंजीकरण होने के अधिकतमः 30 दिन के अंदर पात्र लाभार्थी के खाते में किस्त का भुगतान हो जाए।

योजना के अंतर्गत पंजीकरण–

क. मातृत्व लाभ प्राप्त करने की इच्छुक पात्र महिलाओं राज्य/संघ राज्य क्षेत्र के कार्यान्वयन विभाग के आधार पर आंगनबाड़ी केंद्र / अनुमोदित स्वास्थ्य सुविधा केंद्र में योजना के अंतर्गत पंजीकरण करायेगी।

ख. पंजीकरण के लिए लाभार्थी स्वयं तथा अपने पति द्वारा विधिवत रूप से हस्ताक्षरित वचन पत्र / सहमति पत्र तथा संगत दस्तावेजों के साथ निर्धारित आवेदन फार्म 1क, जो हर दृष्टि से पूर्ण हो आंगनवाड़ी केंद्र / अनुमोदित स्वास्थ्य सुविधा केंद्र में प्रस्तुत करेंगे। फार्म प्रस्तुत करते समय लाभार्थियों से योजना में आधार प्रयोग करने पर लाभार्थी एवं उसे का लिखित सहमति, अपना / पति / परिवार के सदस्य का मोबाइल नम्बर तथा अपने (लाभार्थी) बैंक / डाकघर खाते का ब्यौरा प्रस्तुत करने की अपेक्षा होगी ।

ग.. आंगनवाड़ी केंद्र / अनुमोदित स्वास्थ्य सुविधा केंद्र से निर्धारित फार्म निःशुल्क प्राप्त किए जा सकते हैं। फार्म महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की वेबसाइट (https://wcd.nic.in/) से भी डाउनलोड किए जा सकते हैं।

घ. लाभार्थियों से पंजीकरण तथा किस्त के दावे के लिए योजना के अंतर्गत निर्धारित फार्म भरने तथा आंगनवाड़ी केंद्र / अनुमोदित स्वास्थ्य सुविधा केंद्र में उसे जमा करने की अपेक्षा होगी। लाभार्थी को चाहिए कि वे रिकार्ड तथा भावी संदर्भ के लिए आंगनवाड़ी कार्यकर्त्री / आशा / एएनएम से पावती लें।

निर्धारित फार्म भरने के लिए संक्षिप्त अनुदेश निम्नानुसार हैं –

1. पंजीकरण तथा पहली किस्त का दावा करने के लिए, एमसीपी कार्ड (जच्चा-बच्चा संरक्षण कार्ड) लाभार्थी एवं उसके पति के पहचान के प्रमाण [दोनों का आधार कार्ड या अनुमत वैकल्पिक पहचान पत्र (अनुलग्नक घ के अनुसार)] की प्रति तथा लाभार्थी के बैंक / डाकघर खाते के विवरणों के साथ विधिवत रूप से भरा गया फार्म 1क प्रस्तुत करना होगा।

2. दूसरी किस्त का दावा करने के लिए, लाभार्थी से गर्भधारण के 6 माह बाद कम से कम एक प्रसव पूर्व जांच को दर्शाने वाले एमसीपी कार्ड की प्रतिलिपि के साथ विधिवत रूप से भरा गया फार्म 1ख प्रस्तुत करना होगा।

3. तीसरी किस्त का दावा करने के लिए लाभार्थी से बच्चे के जन्म के पंजीकरण की प्रति तथा एमसीपी कार्ड जिसमें दर्शाया गया हो कि बच्चे ने टीकाकरण का पहला चक्र या इसके समतुल्य / एवजी प्राप्त कर ली है, की प्रति के साथ विधिवत रूप से भरा गया फार्म 1ग प्रस्तुत करना होगा।

4. यदि लाभार्थी ने योजना के अंतर्गत निर्धारित शर्तों का अनुपालन किया है परंतु निर्धारित समय के अंदर पंजीकरण नहीं करा पायी है / दावा प्रस्तुत नहीं कर पायी है तो वह पैरा 36 में निर्धारित ढंग से दावा ( दावे ) प्रस्तुत कर सकती हैं।

5. यदि पहले से बैंक / पोस्ट आफिस खाता लाभार्थी के नाम नहीं है तो एडब्ल्यूडब्ल्यू / आशा / एएनएम लाभार्थी का आधार से जुड़ा बैंक / डाकघर खाता खुलवाने में सहायता प्रदान करेगी। यदि पहले से ही उसके नाम खाता है तो विद्यमान बैंक / डाकघर खाते के साथ आधार नम्बर नहीं जुड़ा है तो उसे आधार से जोड़ने में मदद करेगी।

6. लाभार्थी अपने आधार के साथ अपने बैंक खाते को जोड़ने के लिए फार्म 2क प्रस्तुत कर सकते हैं, यदि खाता पहले से आधार से नहीं जुड़ा है।

7. लाभार्थी अपने आधार के साथ अपने डाकघर खाते को जोड़ने के लिए फार्म 2ख प्रस्तुत कर सकते हैं, यदि खाता पहले से आधार से नहीं जुड़ा है।

8. लाभार्थियों का आधार नम्बर न होने पर भी एडब्ल्यूडब्ल्यू / आशा / एएनएम बैंक / डाकघर खाता खुलवाने का सुनिश्चय करेंगी और आधार कार्ड प्राप्त करने में सहायता प्रदान करेंगी। क. लाभार्थी / उसका पति आधार के लिए पंजीकरण अथवा यूआईडीएआई के साथ पंजीकृत विवरणों को अपडेट करने के लिए फार्म 2ग प्रस्तुत कर सकते हैं।

लाभार्थी निम्नलिखित परिस्थितियों में योजना के अंतर्गत पंजीकृत विवरणों को अपडेट करने / परिवर्तित करने के लिए फार्म 3 प्रस्तुत कर सकते हैं:-

  • पता और / या मोबाइल नम्बर में परिवर्तन;
  • लाभार्थी या उसके पति के आधार नम्बर को शामिल करना यदि पंजीकरण के समय यह प्रदान नहीं किया गया है;
  • बैंक / डाकघर खाते में परिवर्तन;
  • आधार की तरह नाम में परिवर्तन ।

पुरानी मातृत्व सहयोग योजना योजना के अंतर्गत पहले से ही पंजीकृत तथा केवल पहली किस्त प्राप्त करने वाले लाभार्थी पात्रता तथा शर्तों की पूर्ति के अधीन पीएमएमवीवाई के अंतर्गत तीसरी किस्त का दावा करने के लिए विधिवत रूप से भरा गया फार्म 1क और फार्म 1ग प्रस्तुत कर सकती हैं। 11. यदि लाभार्थी और / या उसके पति का आधार कार्ड न हो तो वे आधार की ईआईडी नम्बर प्रदान कर सकते हैं या फार्म 1क में पहचान के किसी प्रमाण के साथ आधार आई नामांकन (फार्म 2ग) के लिए अपना अनुरोध दर्ज करा सकते हैं।

  • लाभार्थी एवं उसके पति से तीसरी किस्त जिसके लिए लाभार्थी एवं उसके पति के आधार नम्बर अनिवार्य हैं, के लिए हकदार बनने हेतु राज्य / संघ राज्य क्षेत्र के कार्यान्वयन विभाग की सुगमता के माध्यम से अथवा स्वयं आधार के लिए पंजीकरण कराने की अपेक्षा है। योजना के अंतर्गत वैकल्पिक आई डी प्रदान करने वाले किसी के लिए योजना के अंतर्गत पंजीकरण की तिथि से 90 दिन के अंदर आधार के लिए पंजीकरण कराना अनिवार्य है।
  • असम, मेघालय और जम्मू एवं कश्मीर के लाभार्थियों को आधार अधिनियम, 2016 की धारा 7 के अंतर्गत जारी की गई अधिसूचना के अनुसार आधार प्रस्तुत करने की आवश्यकता से छूट प्रदान की गई है (कृपया अनुलग्नक घ देखें)।
  • लाभार्थी के गर्भधारण की गणना एमसीपी कार्ड में उल्लिखित उसकी पिछली माहवारीचक्र की तिथि के आधार पर की जाएगी।
  • पीएमएमवीवाई के अंतर्गत पंजीकृत प्रत्येक लाभार्थी बरती के आंगनवाड़ी केंद्र / आशा / एएनएम से जच्चा-बच्चा संरक्षण (एमसीपी) कार्ड प्राप्त करेंगे। भुगतान के लिए शर्त (शर्तों) के सत्यापन के माध्यम के रूप में एमसीपी कार्ड का प्रयोग किया जाएगा।

क. पहली किस्त का दावा करने के लिए लाभार्थी आंगनवाड़ी केंद्र / गांव / अनुमोदित स्वास्थ्य सेवा केंद्र में संगत दस्तावेजों के साथ विधिवत रूप से भरा गया फार्म 1क जमा करेंगे।

ख. योजना के अंतर्गत पहली किस्त का दावा करने के लिए लाभार्थी तभी पात्र होंगे जब वे आंगनवाड़ी केंद्र में अथवा आशा / एएनएम के यहां एलएमपी तिथि (एमसीपी कार्ड पर दोनों तिथियों का उल्लेख होता है) से 5 माह (अर्थात 150 दिन) की समय सीमा के अंदर अपने गर्भधारण का पंजीकरण कराएंगे।

ग. लाभार्थियों को लाभों के संवितरण के लिए प्रक्रिया का कार्य आंगनवाड़ी केंद्र/गांव / अनुमोदित स्वास्थ्य सेवा केंद्र में पंजीकरण की तिथि से 30 दिन पहले पूरा कर लिया जाएगा ताकि योजना के अंतर्गत पंजीकरण की तिथि से 30 दिन के अंदर लाभार्थियों को लाभों का अंतरण हो सके।

घ. पीएनएमबीवाई के अंतर्गत लाभ लेने के इच्छुक व्यक्ति अपेक्षित दस्तावेजों के साथ आंगनबाड़ी कार्यकर्त्री / आशा / एएनएम को फार्म 1क में शर्तों की पूर्ति तथा पंजीकरण फार्म में यथा निर्धारित विवरण प्रस्तुत करेंगे । पूर्ण आवेदन पत्र तथा अपेक्षित दस्तावेज प्राप्त होने पर आंगनवाड़ी कार्यकर्त्री / आशा / एएनएम लाभार्थी को पीएमएमवीवाई के अंतर्गत पंजीकृत करेगी तथा एक सप्ताह के अंदर पर्यवेक्षक / एएनएम को विवरण भेजेगी। आंगनवाड़ी कार्यकर्त्री / आशा / एएनएम से प्राप्त प्रस्ताव की पर्यवेक्षक / एएनएम द्वारा समेकित रूप में जांच की जाएगी तथा भुगतान / प्रक्रिया / ऑनलाइन पंजीकरण के लिए उसे हर सप्ताह संबंधित सीडीपीओ / स्वास्थ्य ब्लॉक अधिकारी (चिकित्सा अधिकारी) को प्रस्तुत किया जाएगा।

क. दूसरी किस्त का दावा करने के लिए लाभार्थी अपेक्षित दस्तावेजों के साथ एडब्ल्यूडब्ल्यू / आशा / एएनएम को विधिवत रूप से भरा गया फार्म 1ख प्रस्तुत करेंगे ।

ख.लाभार्थी अपेक्षित दस्तावेजों की छाया प्रतियों के साथ फार्म 1ख में शर्तों की पूर्ति का प्रमाण प्रस्तुत करेंगे ।

ग. दावे का पूर्ण फार्म तथा अपेक्षित दस्तावेज़ प्राप्त होने पर एडब्ल्यूडब्ल्यू / आशा / एएनएम मातृत्व लाभ की दूसरी किस्त के संवितरण की प्रक्रिया हेतु एक सप्ताह के अंदर पर्यवेक्षक / एएनएम को विवरण भेजेगी ।

घ. आंगनवाड़ी कार्यकर्त्री / आशा / एएनएम से प्राप्त प्रस्ताव की पर्यवेक्षक / एएनएम द्वारा समेकित रूप में जांच की जाएगी तथा भुगतान / प्रक्रिया के लिए उसे हर सप्ताह संबंधित सीडीपीओ / स्वास्थ्य ब्लॉक अधिकारी (चिकित्सा अधिकारी) को प्रस्तुत किया जाएगा।

ङ. लाभार्थियों को मातृत्व लाभ की दूसरी किस्त के संवितरण की प्रक्रिया शर्तों की पूर्ति के प्रमाण से संबंधित फार्म 1ख में दावा प्राप्त होने की तिथि से 30 दिन पहले पूरी की जाएगी।

प्रधानमंत्री मातृ वन्दना योजना (PMMVY) तीसरी किस्त के लिए दावे की प्रक्रिया

क. इस किस्त का दावा करने के लिए लाभार्थी एडब्ल्यूडब्ल्यू / आशा / एएनएम को संगत दस्तावेजों के सा विधिवत रूप से भरा गया फार्म 1ग प्रस्तुत करेंगे।

ख. लाभार्थी अपेक्षित दस्तावेजों की छाया प्रतियों के साथ फार्म 1ग में शर्तों की पूर्ति का प्रमाण प्रस्तुत करेंगे ।

ग. पीएमएमवीवाई के अंतर्गत यह किरत प्राप्त करने हेतु पात्र बनने के लिए लाभार्थी के लिए अपना और अपने पति का आधार नम्बर प्रस्तुत करना अनिवार्य है, यदि पहले प्रस्तुत नहीं किया गया है।

घ. दावे का पूर्ण फार्म तथा अपेक्षित दस्तावेज़ प्राप्त होने पर एडब्ल्यूडब्ल्यू / आशा / एएनएम मातृत्व लाभ की तीसरी किस्त के संवितरण की प्रक्रिया करने हेतु एक सप्ताह के अंदर पर्यवेक्षक / एएनएम को विवरण भेजेगी।

ङ. आंगनवाड़ी कार्यकर्त्री / आशा / एएनएम से प्राप्त प्रस्ताव की पर्यवेक्षक / एएनएम द्वारा समेकित रूप में जांच की जाएगी तथा भुगतान / प्रक्रिया के लिए उसे हर सप्ताह संबंधी सीडीपीओ / स्वास्थ्य ब्लॉक अधिकारी (चिकित्सा अधिकारी) को प्रस्तुत किया जाएगा।

च. लाभार्थी को मातृत्व लाभ की तीसरी किस्त के संवितरण के लिए प्रक्रिया का कार्य शर्तों की पूर्ति के प्रमाण से संबंधी फार्म 1ग में दावा प्राप्त होने की तिथि से 30 दिन पहले पूरा कर लिया जाएगा ।

क. लाभार्थी विशिष्ट शर्तों की पूर्ति के अधीन तीन किस्तों में कुल 5,000 /- रुपये का नकद प्रोत्साहन प्राप्त करेंगे।
ख. भुगतान यथास्थिति लाभार्थी के बैंक / डाकघर खाते में, न कि पति / परिवार के सदस्य के खाते में / संयुक्त खाते में जमा किया जाएगा।

योजना के अंतर्गत तीन किस्तों के लिए शर्तें इस प्रकार हैं –

पहली किस्त -नीचे उल्लिखित शर्तों की पूर्ति पर गर्भधारण के समय से पंजीकरण के मामले में 1,000/- रुपये : एमसीपी कार्ड में गर्भधारण के समय से पंजीकरण का प्रमाण (एलएमपी की तिथि से 150 दिन के अंदर गर्भधारण का पंजीकरण) जो स्वास्थ्य विभाग के किसी अधिकारी / पदाधिकारी जिसकी रैंक एएनएम से कम न हो, द्वारा विधिवत रूप से प्रमाणित हो ।

दूसरी किस्त नीचे उल्लिखित शर्तों की पूर्ति पर गर्भधारण के छह माह बाद 2,000 /- रुपये : एमसीपी कार्ड पर लाभार्थी की कम से कम एक प्रसव पूर्व जांच जो स्वास्थ्य विभाग के किसी अधिकारी / पदाधिकारी जिसकी रैंक एएनएम से कम न हो, द्वारा विधिवत रूप से प्रमाणित हो ।

तीसरी किस्त -नीचे उल्लिखित शर्तों की पूर्ति पर 2,000/- रुपये:  बच्चे के जन्म का पंजीकरण कराया गया है। राज्य / संघ राज्य क्षेत्र के किसी अधिकृत प्राधिकारी द्वारा जारी किया गया प्रमाण पत्र बच्चे के जन्म के प्रमाण के रूप में स्वीकार किया जाएगा। इस बात का प्रमाण कि बच्चे ने बीसीजी, ओपीवी, डीपीटी तथा हैप्पेटाइटिस बी या इसके रामतुल्य / एवजी का पहला चक्र प्राप्त कर लिया है, एमसीपी कार्ड जो स्वास्थ्य विभाग के किसी अधिकारी / पदाधिकारी जिसकी रैंक एएनएम से कम न हो, द्वारा विधिवत रूप से प्रमाणित हो । टीकाकरण का कार्य स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी की गई अनुसूची (अनुलग्नक-ठ) के अनुसार बच्चे के जन्म के वरीयता 14 सप्ताह के अंदर पूरा किया जाना है। एडब्ल्यूडब्ल्यू / आशा / एएनएम पांचवें माह की शुरूआत में लाभार्थी के एमसीपी कार्ड की जांच यह सुनिश्चित करने के लिए करेगी कि शिशु को सभी टीके लगे हो ।

लाभार्थियों को योजना के उद्देश्यों को पूरा करने हेतु योजना के अंतर्गत प्राप्त लाभों का समुचित रूप से उपयोग करने के लिए वरीयता शर्तों की पूर्ति के ठीक बाद आवेदन करना चाहिए। यदि वह सामान्य समय सीमा के अंदर आवेदन नहीं कर पाती है तो निम्नलिखित पर विचार किया जा सकता है:

  1. गर्भधारण के 730 दिन बाद योजना के अंतर्गत मातृत्व लाभ का कोई दावा स्वीकार्य नहीं होगा। एमसीपी कार्ड में दर्ज एलएमपी इस संबंध में विचार के लिए गर्भधारण की तिथि होगी।
  2. पात्रता के मापदंडों एवं शर्तों की पूर्ति के अधीन किस्तों का दावा स्वतंत्र रूप से न कि एक-दूसरे के साथ जोड़कर किया जा सकता है ।
  3. लाभार्थी किसी भी समय परंतु गर्भधारण के अधिकतम 730 दिन के अंदर आवेदन कर सकते हैं, भले ही उन्होंने पहले किसी किस्त के लिए दावा न किया हो परंतु लाभ प्राप्त करने हेतु पात्रता के मापदंडों एवं शर्तों को पूरा करते हैं।
  4. ऐसे मामलों में जहां एमसीपी कार्ड में एलएमपी तिथि दर्ज नहीं है अर्थात लाभार्थी योजना के अंतर्गत तीसरी किस्त का दावा करने के लिए आ रही है, तो ऐसे मामलों में दावा बच्चे के जन्म की तिथि से 460 दिन के अंदर प्रस्तुत करना अनिवार्य है तथा इस अवधि के बाद किसी भी दावे पर विचार नहीं किया जाएगा।

सभी पात्र लाभार्थी जिन्होंने आवेदन किया है तथा शर्तों को पूरा करते हैं, सक्षम प्राधिकारी द्वारा अनुमोदन पर अपने व्यक्तिगत बैंक / डाकघर खाते में जो उनके आवेदन पत्र में उल्लिखित है, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के माध्यम से भुगतान प्राप्त करेंगे, जो इस प्रकार हैं:

  1. लाभों का अंतरण केवल बैंक / डाकघर खाते में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से होगा।
  2. नकद या चैक के रूप में कोई संवितरण नहीं होगा।
  3. बैंक तथा डाकघर जो पीएफएमएस से जुड़े हैं, के माध्यम से धन का अंतरण होगा।
  1. यदि लाभार्थी तीसरी किस्त के लिए शर्तों को पूरा करती है परंतु शिशु छह माह से अधिक समय तक जिवित नहीं रहता है तो उसे तीसरी किस्त दी जाएगी।
  2. यदि लाभार्थी दो बच्चों/तीन बच्चों/चार बच्चों को जन्म देती है तो इसे परिवार में पहले जीवित जन्म के रूप में माना जाएगा।
  3. किसी भी कारण से राज्य के अंदर या राज्यों के बीच प्रवासन के मामले में लाभार्थी राज्य / संघ राज्य क्षेत्र स्तर पर कार्यान्वयन एजेंसी के आधार पर निकटतम आंगनवाड़ी केंद्र / अनुमोदित स्वास्थ्य सुविधा केंद्र में आधार नम्बर या एमसीपी कार्ड तथा पावती पर्ची प्रस्तुत करने पर तथा प्रत्येक किस्त के लिए शर्तों की पूर्ति के बाद शेष लाभ प्राप्त कर सकती हैं ।
  4. घ लाभार्थी द्वारा फर्जी दावे के मामले में उसे भुगतान की गई राशि की वसूली की जाएगी तथा ऐसा न होने पर उस पर कानून के अनुसार कार्रवाई की जा सकती हैं।