यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के विवादित समानता नियमों (UGC Equity Regulations 2026) को लेकर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने अदालत को सूचित किया है कि वह इन नियमों की समीक्षा करने और छात्रों की चिंताओं को दूर करने के लिए एक विशेष समिति (Special Committee) का गठन करने जा रही हैI

सुप्रीम कोर्ट में आज क्या हुआ?
केंद्र सरकार का बयान: मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ के सामने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि सरकार नई पीढ़ी के हितों को ध्यान में रखकर काम कर रही है और यह सुनिश्चित करना चाहती है कि
कोर्ट की सलाह और मोहलत: चीफ जस्टिस ने कहा कि नियम ऐसे होने चाहिए जो हर छात्र के हितों की रक्षा करें। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई को चार हफ्तों के लिए टाल दिया है, ताकि सरकार समिति गठित कर नियमों पर पुनर्विचार कर सके।
विवाद की मुख्य वजह क्या है?
UGC ने इस साल 13 जनवरी को ‘उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देना रेगुलेशंस, 2026′ जारी किए थे, जिनका उद्देश्य परिसरों में जातिगत भेदभाव को रोकना था। लेकिन इन नियमों को लेकर कई याचिकाएं दायर की गईं, जिनमें मुख्य आपत्तियां ये थीं:
सामान्य वर्ग को बाहर रखना: इन नियमों के क्लॉज 3(1)(c) में जाति-आधारित भेदभाव को मुख्य रूप से SC, ST और OBC छात्रों के संदर्भ में ही परिभाषित किया गया था। याचिकाकर्ताओं (विशेषकर सामान्य वर्ग के छात्रों) का तर्क था कि यह ढांचा भेदभावपूर्ण है और गैर-आरक्षित वर्ग के छात्रों को शिकायत निवारण तंत्र से बाहर रखता है।
प्रावधानों की अस्पष्टता: नियमों में कई परिभाषाएं साफ़ नहीं थीं, जिससे शैक्षणिक संस्थानों की स्वायत्तता प्रभावित होने और नियमों के मनमाने दुरुपयोग का खतरा था।
अन्य कमियां: इन नियमों में रैगिंग (Ragging) को लेकर स्पष्ट तंत्र की कमी और झूठी शिकायतें दर्ज कराने वालों के खिलाफ दंड का कोई प्रावधान नहीं था।
सुप्रीम कोर्ट ने पहले क्या कहा था?
सुप्रीम कोर्ट ने इस साल 29 जनवरी को ही इन नए नियमों के लागू होने पर अंतरिम रोक (Stay) लगा दी थी। कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा था कि पहली नजर में ये नियम समाज को बांटने वाले और “अस्पष्ट” लगते हैं, जिनका गंभीर सामाजिक प्रभाव हो सकता है।
शब्द सरिता (The River of Words in Hindi.)