मध्यावधि चुनाव में हार: ट्रंप ने माना- ईरान युद्ध और तेल के बढ़े दाम पड़े भारी; तेहरान में जश्न का माहौल

अमेरिकी मध्यावधि चुनावों (मिडटर्म इलेक्शंस) के नतीजों में डेमोक्रेटिक पार्टी ने प्रतिनिधि सभा (House of Representatives) और सीनेट (Senate) दोनों सदनों में बहुमत हासिल कर लिया, जिससे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी रिपब्लिकन पार्टी को बड़ा राजनीतिक झटका लगा।

डोनाल्ड ट्रंप का बयान और हार की वजहें

ईरान युद्ध और तेल की कीमतें जिम्मेदार: डोनाल्ड ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने स्वीकार किया कि ईरान के साथ चल रहे सैन्य टकराव, इसके कारण कच्चे तेल/गैस की बढ़ी कीमतों और महंगाई ने मतदाताओं के फैसले में अहम भूमिका निभाई और इसका नुकसान रिपब्लिकन उम्मीदवारों को उठाना पड़ा।

नीतियों का बचाव: ट्रंप ने हार पर हैरानी जताते हुए कहा कि हालांकि ईरान संकट का राजनीतिक असर पड़ा, लेकिन ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना उनके लिए चुनावी नतीजों से कहीं अधिक जरूरी फैसला था। उन्होंने डेमोक्रेट्स को जीत की बधाई भी दी।

तेहरान में प्रतिक्रिया और जश्न

ईरान का आधिकारिक रुख: ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने चुनाव नतीजों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अमेरिकी जनता ने अपने वोट के जरिए युद्ध को “ना” कहा है। उन्होंने कहा कि युद्ध और महंगाई के खिलाफ जनता के इस संदेश का वाशिंगटन को सम्मान करना चाहिए।

सड़कों पर प्रदर्शन व जश्न: नतीजों के बाद राजधानी तेहरान (विशेषकर एंगेलाब स्क्वायर के आसपास) में लोगों ने एकत्र होकर ट्रंप, जेडी वेंस और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के पोस्टर व बैनर जलाए और रिपब्लिकन पार्टी की हार को अपनी कूटनीतिक जीत की तरह पेश किया।

आगे का असर

मध्यावधि चुनाव में ट्रम्प की पार्टी की हार के बाद अन्रराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गयी है। कच्चा तेल बें्रट कू्रड लगभग 94.62 डाॅलर प्रति बैरल तथा कू्रड आयल 88.12 डाॅलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गया है। निवेशकों को उम्मीद है कि ट्रंप को चुनावी झटके के बाद अमेरिका इरान के साथ समझौते की कोशिशें तेज कर सकता है।

दोनों सदनों में डेमोक्रेट्स के नियंत्रण के बाद ट्रंप प्रशासन पर युद्ध को लंबा खींचने, ऊर्जा नीति और सैन्य बजट को लेकर भारी दबाव का सामना करना पड़ेगा। विशेषज्ञों के अनुसार, कांग्रेस का यह बदलाव ट्रंप की विदेश और टैरिफ नीतियों पर कड़ी निगरानी और संतुलन लाएगा।